जिनेवा: विश्व स्वास्थ्य संगठन इस तथ्य का पता लगने के बाद कि कोरोना वायरस कुछ खास हालात में हवा में भी जिंदा रह सकता है, मेडिकल स्टाफ के लिए बेहतर सुरक्षा उपाय चाहता है। बता दें कि कई शोधों के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि यह वायरस विभिन्न परिस्थितियों में हवा में भी जिंदा रह सकता है। WHO ने कहा है कि कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज में लगे लोगों को ‘ऐरोसोल प्रोसीजर’ अपनाने की वजह से अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है और उन्हें एन-95 मास्क पहने रहना चाहिए।
हवा में कई कारकों से जिंदा रह सकता है वायरस
इस वायरस का प्रसार छींकने या खांसने के बाद तरल पदार्थों, ड्रॉपलेट्स आदि के माध्यम से होता है। WHO के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कोरोना वायरस मानव-से-मानव संपर्क, छींक और खांसी के साथ-साथ निर्जीव वस्तुओं पर चिपके कीटाणुओं के माध्यम से फैलता है। कोरोना वायरस हवा में भी फैल सकता है, और गर्मी एवं आर्द्रता जैसे कारकों के आधार पर वहां कुछ देर तक टिका रह सकता है। अधिकारियों ने बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि विभिन्न परिस्थितियों में इस वायरस पर क्या प्रभाव पड़ता है।
WHO ने दिया ज्यादा से ज्यादा संदिग्धों की जांच पर जोर
अभी तक की शुरुआती जांच में पता चला है कि यह वायरस स्टील और तांबे पर 2 घंटे तक जिंदा रह सकता है, लेकिन प्लास्टिक और कार्डबोर्ड पर यह अवधि ज्यादा हो सकती है। इसके साथ ही WHO ने हर संदिग्ध मामले की जांच करने पर जोर दिया है। WHO ने कहा है कि ज्यादा से ज्यादा संदिग्धों की जांच करके उन्हें पॉजिटिव पाए जाने पर आइसोलेट किया जाए। इसके साथ ही उन लोगों का भी पता लगाया जाए जो पीड़ितों में लक्षण आने से पहले 2 दिन तक उन्हें मिले थे, और उनकी भी जांच की जाए।
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